ऐसी खबरें हैं कि प्रशासकों की समिति (सीओए) के चयन संबंधित बैठक के नियम बदलने के कारण बीसीसीआई अधिकारी खफा हैं और इसलिए इस बैठक को स्थागित किया गया है क्योंकि नियम बदलने के कारण कुछ बदलाव होने हैं.
मुंबई: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने गुरुवार को जानकारी दी है कि आगामी विंडीज दौरे के लिए सीनियर चयन समिति की शुक्रवार को होने वाली बैठक स्थागित कर दी गई है. बोर्ड ने हालांकि बैठक की नई तारीख के बारे में नहीं बताया है, लेकिन संभवत: यह बैठक शनिवार यानि 20 जुलाई को हो सकती है.
बीसीसीआई ने कहा, “मुंबई में शुक्रवार को चयन समिति की बैठक नहीं है. अगली तारीख जब भी तय होगी इसके बारे में जानकारी दे दी जाएगी.” सूत्रों के मुताबिक इस बैठक के रद्द होने का कारण एम एस धोनी के चयन को लेकर संशय है. बताया जा रहा है कि चयनकर्ता धोनी के चयन को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं.
ऐसी खबरें हैं कि प्रशासकों की समिति (सीओए) के चयन संबंधित बैठक के नियम बदलने के कारण बीसीसीआई अधिकारी खफा हैं और इसलिए इस बैठक को स्थागित किया गया है क्योंकि नियम बदलने के कारण कुछ बदलाव होने हैं.
सीओए ने साफ कहा है कि बोर्ड के सचिव अब चयन समिति की बैठक के कन्वेनर नहीं होंगे न ही समिति को किसी तरह की मंजूरी के लिए सचिव या बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की मंजूरी लेनी होगी.
इससे पहले एक इंग्लिश न्यूज चैलन के शो पर पर पैनल चर्चा में सहवाग ने कहा, “यह धोनी पर छोड़ देना चाहिए कि वह संन्यास कब लेंगे. चयनकर्ताओं का काम यह है कि वह धोनी से बात करें और उन्हें बताएं कि वह अब धोनी को आगे मौके नहीं दे सकते.”
सहवाग ने साथ ही कि कहा कि काश उनके समय में चयनकर्ता उनसे भी अपनी रणनीति साझा करते. सहवाग ने कहा, “काश चयनकर्ताओं ने मुझे से भी मेरी रणनीति के बारे में पूछा होता तो मैं भी उन्हें बता पाता.”
https://www.tv9bharatvarsh.com/india/ram-mandir-babri-masjid-doordarshan-team-reached-ayodhya-even-before-lock-was-opened-106371.html Facebook Twitter Email LinkedIn एक ताले के भीतर अयोध्या की आग दबी हुई थी. ताला खुला और आग भड़क उठी. इस आग ने पहले अयोध्या को जलाना शुरू किया फिर दावानल बनकर पूरे देश में फैल गई. ये आग अपने पीछे एक जलता हुआ सवाल छोड़ गई. अयोध्या में रामजन्मभूमि का ताला खुलवाने के पीछे कांग्रेस थी या भाजपा? राजीव गांधी थे या विश्व हिंदू परिषद्? ये सवाल आज भी धधक रहा है. ताला कैसे खुला? उसके पीछे कौन लोग थे? और वे कौन लोग थे, जो अब तक सामने नहीं आए हैं? क्या किसी एक गलती से देश का ध्यान हटाने के लिए तब की सरकार ने दूसरी बड़ी गलती की थी? उस रोज क्या हुआ था? यह अब तक तिलिस्म की तरह है. इतने बड़े फैसले की किसी को कानों कान खबर तक नहीं थी. अगर ताला न खुलता तो विवादित जगह पर शिलान्यास न होता. अगर शिलान्यास न होता तो ढांचा न गिरता. यानी अयोध्या में ध्वंस की जड़ में था विवादित परिसर का ताला खोला जाना. नफा-नुकसान को तौलकर, एक सोची-समझी राजनीति के तहत ताला खुलवाने का ...
https://www.tv9bharatvarsh.com/sports/pakistan-cricket-team-coach-misbah-ul-haq-salary-is-nothing-compared-to-ravi-shastri-106352.html पाकिस्तान क्रिकेट टीम के हेड कोच और चीफ सिलेक्टर मिस्बाह उल हक ने पहली बार अपने वेतन को लेकर बात की है. उन्होंने बताया कि ‘मैंने पीसीबी से कहा था कि मुझे उतना ही वेतन दिया जाए जितना पूर्व कोच मिकी ऑर्थर को मिलता था.’ ‘नौकरी पाने के लिए कोई जादू नहीं किया’ मिस्बाह ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मैंने नौकरी पाने के लिए कोई जादू नहीं किया. मैंने किसी तरह के वेतन की मांग भी नहीं की. मैंने उनसे सिर्फ वही वेतन देने को कहा था जो वह मिकी आर्थर को दे रहे थे.” पाकिस्तान के चैनल जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्बाह को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) 28 लाख रुपये महीने देगा. वहीं, एक्प्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीसीबी पूर्व कोच आर्थर को 20,000 डालर प्रति महीने देती थ रिपोर्ट के मुताबिक, टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री का सालाना वेतन करीब 10 करोड़ रुपए है. इस लिहाज से देखें तो मिस्बाह का वेतन शास्त्री की तुलना में करीब दो ग...
https://www.tv9bharatvarsh.com/india/kerala-police-officer-aparna-lavakumar-donated-her-hair-for-cancer-patients-106377.html केरल के त्रिसूर जिले की पुलिस अफसर अपर्णा लवकुमार की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. अपर्णा ने कैंसर मरीजों का विग बनाने के लिए अपने बाल दान कर दिए हैं. उनकी हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है. अपर्णा ने अपनी इस तारीफ पर कहा ‘मैंने जो किया वो कोई बहुत बड़ी बात नहीं है. बाल तो एक दो साल में वापस आ जाएंगे. मेरे लिए असल में वो लोग हीरो हैं जो जरूरतमंदों को अंगदान करते हैं. सूरत से ज्यादा आपका काम मायने रखता है.’ अपर्णा को लोग मददगार अफसर के रूप में जानते हैं. वे पहले भी लोगों की सहायता कर चुकी हैं.तकरीबन 10 साल पहले एक परिवार में एक बच्चे की मौत हो गई थी. परिवार के पास बच्चे की बॉडी को ले जाने के लिए पैसे नहीं थे. अपर्णा ने उस वक्त अपने तीन सोने के कंगन परिवार को दे दिए थे. तब उस गरीब परिवार ने 60 हजार का बिल चुकाया और बॉडी ले गए. अपर्णा के साथ काम करने वाले उनका बड़ा सम्मान करते हैं, उन्हें अपना आदर्श मानते हैं. अपर्णा बताती हैं कि वे पहले भी थोड़े थोड़े बाल दान ...
Comments
Post a Comment