एक सीक्रेट इनफॉर्मेशन के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. ये दोनों शक्स घी के डिब्बों में अवैध हथियार भर कर लिए जा रहे थे TV9 Bharatvarsh
नई दिल्ली:एक सीक्रेट इनफॉर्मेशन के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. ये दोनों शक्स घी के डिब्बों में अवैध हथियार भर कर लिए जा रहे थे तभी पुलिस की स्पेशल सेल ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है. बताया जा रहा है गिरफ्तार हुए दोनों आरोपी जीजा-साला हैं.
घी के ये डिब्बे पूरे भरे हुए थे, लेकिन जब इन्हें खाली किया गया तो इनके अंदर से गैरकानूनी हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया गया. स्पेशल सेल ने देसी घी के इन डिब्बों से 26 पिस्टल और 26 मैगज़ीन बरामद की हैं.
स्पेशल सेल डीसीपी प्रमोद सिंह कुशवाह के मुताबिक उनकी टीम को जानकारी मिली थी कि तस्करों का एक गैंग मध्य प्रदेश के खरगौन से हथियार की खेप दिल्ली लेकर आ रहा है. इस गैंग के बारे ज्यादा जानकारी जुटाई गयी तो पता लगा कि गैंग के दो तस्कर दिल्ली के गाजीपुर इलाके में हथियारों की खेप लेकर वाले हैं. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने गाजीपुर इलाके में घेराबंदी कर दी.
पुलिस ने फिर शक के आधार पर एक बोलेरो जीप को रोका. जीप में दो लोग सवार थे. पुलिस ने जब जीप की जांच की तो पहले उन्हें कुछ नहीं मिला, उसके बाद गाड़ी में रखे घी के दो बड़े डिब्बों पर नजर गयी. जब डिब्बों को खोलकर चेक किया तो उनके अंदर पॉलिथीन में पैक करके रखे गए 26 पिस्टल और 26 मैग्जीन बरामद हुई.
गिरफ्तार किए गए दोनों तस्करों की पहचान आगरा के रहने वाले राजबहादुर और भिंड के रहने वाले एक तस्कर जितेंद्र उर्फ जीतू के रूप में हुई है. स्पेशल सेल के मुताबिक, ये लोग 8 और 10 हजार में खरगौन से पिस्टल खरीदते थे और दिल्ली में 10 से 25 हजार में बेच देते थे.
https://www.tv9bharatvarsh.com/india/ram-mandir-babri-masjid-doordarshan-team-reached-ayodhya-even-before-lock-was-opened-106371.html Facebook Twitter Email LinkedIn एक ताले के भीतर अयोध्या की आग दबी हुई थी. ताला खुला और आग भड़क उठी. इस आग ने पहले अयोध्या को जलाना शुरू किया फिर दावानल बनकर पूरे देश में फैल गई. ये आग अपने पीछे एक जलता हुआ सवाल छोड़ गई. अयोध्या में रामजन्मभूमि का ताला खुलवाने के पीछे कांग्रेस थी या भाजपा? राजीव गांधी थे या विश्व हिंदू परिषद्? ये सवाल आज भी धधक रहा है. ताला कैसे खुला? उसके पीछे कौन लोग थे? और वे कौन लोग थे, जो अब तक सामने नहीं आए हैं? क्या किसी एक गलती से देश का ध्यान हटाने के लिए तब की सरकार ने दूसरी बड़ी गलती की थी? उस रोज क्या हुआ था? यह अब तक तिलिस्म की तरह है. इतने बड़े फैसले की किसी को कानों कान खबर तक नहीं थी. अगर ताला न खुलता तो विवादित जगह पर शिलान्यास न होता. अगर शिलान्यास न होता तो ढांचा न गिरता. यानी अयोध्या में ध्वंस की जड़ में था विवादित परिसर का ताला खोला जाना. नफा-नुकसान को तौलकर, एक सोची-समझी राजनीति के तहत ताला खुलवाने का ...
https://www.tv9bharatvarsh.com/sports/pakistan-cricket-team-coach-misbah-ul-haq-salary-is-nothing-compared-to-ravi-shastri-106352.html पाकिस्तान क्रिकेट टीम के हेड कोच और चीफ सिलेक्टर मिस्बाह उल हक ने पहली बार अपने वेतन को लेकर बात की है. उन्होंने बताया कि ‘मैंने पीसीबी से कहा था कि मुझे उतना ही वेतन दिया जाए जितना पूर्व कोच मिकी ऑर्थर को मिलता था.’ ‘नौकरी पाने के लिए कोई जादू नहीं किया’ मिस्बाह ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मैंने नौकरी पाने के लिए कोई जादू नहीं किया. मैंने किसी तरह के वेतन की मांग भी नहीं की. मैंने उनसे सिर्फ वही वेतन देने को कहा था जो वह मिकी आर्थर को दे रहे थे.” पाकिस्तान के चैनल जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्बाह को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) 28 लाख रुपये महीने देगा. वहीं, एक्प्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीसीबी पूर्व कोच आर्थर को 20,000 डालर प्रति महीने देती थ रिपोर्ट के मुताबिक, टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री का सालाना वेतन करीब 10 करोड़ रुपए है. इस लिहाज से देखें तो मिस्बाह का वेतन शास्त्री की तुलना में करीब दो ग...
https://www.tv9bharatvarsh.com/india/kerala-police-officer-aparna-lavakumar-donated-her-hair-for-cancer-patients-106377.html केरल के त्रिसूर जिले की पुलिस अफसर अपर्णा लवकुमार की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. अपर्णा ने कैंसर मरीजों का विग बनाने के लिए अपने बाल दान कर दिए हैं. उनकी हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है. अपर्णा ने अपनी इस तारीफ पर कहा ‘मैंने जो किया वो कोई बहुत बड़ी बात नहीं है. बाल तो एक दो साल में वापस आ जाएंगे. मेरे लिए असल में वो लोग हीरो हैं जो जरूरतमंदों को अंगदान करते हैं. सूरत से ज्यादा आपका काम मायने रखता है.’ अपर्णा को लोग मददगार अफसर के रूप में जानते हैं. वे पहले भी लोगों की सहायता कर चुकी हैं.तकरीबन 10 साल पहले एक परिवार में एक बच्चे की मौत हो गई थी. परिवार के पास बच्चे की बॉडी को ले जाने के लिए पैसे नहीं थे. अपर्णा ने उस वक्त अपने तीन सोने के कंगन परिवार को दे दिए थे. तब उस गरीब परिवार ने 60 हजार का बिल चुकाया और बॉडी ले गए. अपर्णा के साथ काम करने वाले उनका बड़ा सम्मान करते हैं, उन्हें अपना आदर्श मानते हैं. अपर्णा बताती हैं कि वे पहले भी थोड़े थोड़े बाल दान ...
Comments
Post a Comment